hindi kavita

किताबें झाँकती हैं। गुलज़ार साहब की बेस्ट हिंदी कविता।

किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से, बड़ी हसरत से तकती हैं. महीनों अब मुलाकातें नहीं होतीं, जो शामें इ…

यही तो ज़िंदगी है.

कुछ दबी हुयी ख्वाइशे है , कुछ मंद मुस्कराहट है || कुछ खोये हुए सपने है ,  कुछ अनसुनी अहाटे है || कुछ दर्द भरे…

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