गुलज़ार बेस्ट हिंदी कविता
किताबें झाँकती हैं। गुलज़ार साहब की बेस्ट हिंदी कविता।
किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से, बड़ी हसरत से तकती हैं. महीनों अब मुलाकातें नहीं होतीं, जो शामें इ…
किताबें झाँकती हैं बंद आलमारी के शीशों से, बड़ी हसरत से तकती हैं. महीनों अब मुलाकातें नहीं होतीं, जो शामें इ…
कुछ दबी हुयी ख्वाइशे है , कुछ मंद मुस्कराहट है || कुछ खोये हुए सपने है , कुछ अनसुनी अहाटे है || कुछ दर्द भरे…
नमस्कार दोस्तों आज जो पोस्ट लेकर आया वह बहुत ही अच्छी है , क्यूंकि इस पोस्ट में एक बेटी ने जो बाते अपने…